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शनिवार, 3 दिसंबर 2016

पद्य का विकास

पद्य का विकास
प्रश्न 1. रीति काल को श्रंगार काल क्यों कहा जाता है ? इस काल के दो कवियों के  नाम तथा उनकी रचनाएँ लिखिए | ( २०१५ )
उत्तर- रीति काल में श्रंगार प्रधान कविताएँ लिखी गई हैं, इसीलिए इस काल को श्रंगार काल कहा जाता है |
इस काल के प्रमुख दो कवियों के नाम तथा उनकी रचनाएँ-

कवि का नाम
रचनाएँ
1. केशवदास 
कविप्रिया, रामचंद्रिका
2. बिहारी  
बिहारी सतसई


प्रश्न 2. रीतिकाल की चार विशेषताएँ लिखिए ? ( २०१६ )
उत्तर- रीतिकाल की चार विशेषताएँ –
1. इस काल में लक्षण ग्रंथ लिखे गए |
2. इस काल की कविता में श्रृंगार रस की प्रधानता थी |
3. इस काल में मुक्तक काव्य की रचना की गई, छंद के रूप में कवित्त, सवैया,दोहा,कुण्डलियाँ आदि का प्रयोग किया गया |
4. इस काल में ब्रजभाषा में उत्कृष्ट कला प्रधान काव्य रचना की गई |  


प्रश्न 3. रीतिकाल के किन्ही चार कवियों के नाम तथा उनकी रचनाएँ लिखिए ? (२०१३)
उत्तर- रीतिकाल के प्रमुख चार कवियों के नाम तथा उनकी रचनाएँ –


कवि का नाम
रचनाएँ
1. केशवदास
कविप्रिया, रसिक प्रिया
2. सेनापति    
कवित्त रत्नाकर, काव्य- कल्पद्रुम
3.  भूषण      
शिवा बावनी, छत्रसाल दशक
4.  मतिराम    
छन्दसार, ललित ललाम 

         
प्रश्न 4. भारतेन्दु युगीन काव्य की चार विशेषताएँ लिखिए ?
उत्तर- भारतेन्दु युगीन काव्य की चार विशेषताएँ –
1. देश- प्रेम और राष्ट्रीयता की भावना से ओत-प्रोत रचना |
2. सामाजिक चेतना का विकास – इस काल का काव्य सामाजिक चेतना का काव्य है |
3. अंगेजी शिक्षा का विरोध – इस काल में कविता के माध्यम से अंगेजी शिक्षा का विरोध किया गया है |
4. काव्यानुवाद की परंपरा – इस युग में अंगेजी तथा संस्कृत साहित्य का हिन्दी भाषा में अनुवाद किया गया |

शनिवार, 26 नवंबर 2016

गद्य का विकास क्रम

गद्य का विकास क्रम 

प्रश्न :- 1. हिन्दी गद्य साहित्य की प्रमुख विधाएँ कौन सी हैं ? 
उत्तर :- हिन्दी गद्य साहित्य की प्रमुख विधाएँ - 
1. नाटक 
2. कहानी 
3. निबन्ध 
4. उपन्यास 
5. एकांकी 
6. आलोचना 

प्रश्न 2 :- हिन्दी गद्य साहित्य की गौड़ विधाओं का नाम लिखिए ? 
उत्तर :- हिन्दी गद्य साहित्य की गौड़  विधाएँ -
1. संस्मरण
2. आत्मकथा 
3. जीवनी 
4. यात्रा- वृतांत 
5. रेखाचित्र 
6. लघुकथा 
7. रिपोर्ताज 
8. साक्षात्कार 
9. पत्र साहित्य 
10. गद्यकाव्य 

प्रश्न 3 :- भारतेंदु युगीन किन्ही चार नाटककारों के नाम तथा उनकी रचनाएँ लिखिए ? 

उत्तर :- भारतेंदु युगीन  चार नाटककारों के नाम तथा उनकी रचनाएँ :- 
1. भारतेंदु हरिश्चन्द्र               -               प्रेम योगिनी 
2. लाल श्रीनिवास दास          -               संयोगिता स्वयंबर 
3. प्रतापनारायण मिश्र          -               भारत दुर्दशा 
4. बालकृष्ण भट्ट                -              जैसा काम वैसा परिणाम 

प्रश्न 4  -नाटक के विकास क्रम के के नाम लिखिए तथा प्रत्येक युग के चार प्रसिध्द नाटककारों के नाम लिखिए । 

उत्तर :-  नाटक के विकास क्रम के के नाम  तथा प्रत्येक युग के चार प्रसिध्द नाटककारों के नाम -
1. भारतेंदु युगीन नाटक -  ( 1850  से 1900 ई. ) 
भारतेंदु हरिश्चन्द्र ,लाल श्रीनिवास दास, प्रतापनारायण मिश्र ,बालकृष्ण भट्ट
2. द्विवेदी युगीन नाटक - ( 1900 से 1920 ई. ) 
किशोरीलाल गोस्वामी, अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' , शिवनंदन सहाय, रायदेवी प्रसाद पूर्ण 
3. प्रसाद युगीन नाटक -  ( 1921 से 1916 ई. ) 
जयशंकर प्रसाद , हरिकृष्ण प्रेमी, सेठगोविंद दास, लक्ष्मीनारायण मिश्र 
4. प्रसादोत्तर युगीन नाटक - ( 1937 से अब तक ) 
जगदीशचंद्र माथुर, उपेन्द्रनाथ 'अश्क', धर्मवीर भारती, मोहन राकेश